Sunday, 10 May 2015

हर व्यक्ति का जीवन है ,जरूरतें हैं ;जिसे पूरा करने के लिए हर इंसान अपने मुफीद रास्ता खोजता है | रास्ता हर युग की परिस्थितियों व उपलब्धियों पर निर्भर करता है | सौ साल पहले कुछ तरीके /सुविधाएँ थी ही नहीं जो आज हैं | अत : आज इंसान अपनी जरूरतें जिस तरह पूरी कर रहा है ,पहले वो थी ही नहीं |

आज दलाल युग है |व्यक्ति विभिन्न क्षेत्रों में दलाली करके पैसा कमा रहा है | हो सकता है किसी युग /समय में ये निंदनीय /अनैतिक माना  जाता रहा हो ,पर आज बिना पसीना बहाए ,"स्मार्ट काम" को सर्वोत्तम समझा जा रहा है | आज जिम में पसीना बहाना स्टैण्डर्ड की बात है , खेत में पसीना बहाना शर्म की या प्रतिष्ठा से नीचे समझा जाता है |